Sunday, February 21, 2021

पेंशन की अबाज बुलंद करो

 *चोर चोर मोसेरे भाई भाई*

                 //बनाम//

*पीड़ित पीड़ित जुड़बा भाई भाई*

🎋🍁😭😭 😒😒😢🌵🌲

*साथियों बात जरा हटके जरूर है पर बात में अगर बात न हो कहना*

 ,, *जब दो एक जैसे कार्य करने बाले व्यक्ति या पात्र मिलते है तो हिंदी का एक मुहावरा अकसर उस मिलन का साक्षी होता है की चोर चोर मोसेरे भाई* ,, 

     *बड़ी अजीव बात है बिना किसी गलती दो सामान कार्य करने बालों को चोर की संज्ञा दे दी जाती है*,, 

आज में इस हिंदी के मुहाबरे में सुधार करना चाहता हूँ ,,     *विशेष कर  पेंशन न मिलने की पीड़ा से पीड़ित दो साथी जब आपस में मिल रहे हो तो हमे उस समय संज्ञा दी जानी  चाहिए की 

  *देखो ये दो पीड़ित-पीड़ित जुड़वाँ भाई भाई!* 

 *ये जुड़वा  भाई जा रहे है* ,,

🧑‍🦯👩‍🦯👬👫👫👫

*जब हम अपने किसी शासकिय विभाग के किसी साथी से मिल रहे हों तो जुड़वा भाई के समान भाव प्रकट होना चाहिय*, 

🤝🤝✊✊🙏🙏

  *और मुझे भरोसा है की जिस दिन किसी की पीड़ा हमारी पीड़ा बन जाएगी ,, किसी दुसरे के  दर्द का अहसास हमे होने लगेगा ,, तो साथियों बो दिन दूर नहीं ,, जब आप के और मेरे दर्द की एक ही दवा हमे प्राप्त ना हो जाये ,, ये जो जुड़ाव का क्षण होता है बहुत ही करुणा और प्रेम समेटे हुए रहता है इस करुणा में जितना करूँण रस है ,, उतना तो गन्ने की लाठी में ना रहता होगा*

 ,, 😭😭😭😭

📝 Murari Lal Rai📝

🙏🌲🍁☘️🍀🌺💐🙏:


 *आह मेरी सेलरी सहेली* 

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🌲🌳☘️💐🍁☘️🌲


*पूरे महीने बाद है आयी सज धज के खाते में सहेली*/

*ऐसा लगा अब तो ह्लः  होगी घर के खाने की पहेली*// 


*सैलरी एक ऐसी ठिठोली*/

 *आशयों की है  हजमोली*// 


 *नजर पड़ी जब कलाई पर*/

*राखी  बोल उठी भैया आ न जाना खली हाथ बेटी की सगाई पर*//

*मामा जो हूँ  कमी कैसे करू इस अवसर पर*/

*खूब भात सजाओ प्रिये , दाग ना लगे पीहर पर*//


*धीरे से भाई बोला भैया क्या गाड़ी का पेट भरा दिया?*/  

*हक़ से प्रिये बोली कार्ड दो साडी लेने को लेट करा दिया*//

 

*सहेली के  टुकड़े कैसे करुं*/ 

*पिछली EMI कैसे भरू*// 


*अश्रु डाल दिए सहेली ने जब कांपती आवाज दी सुनाई*/ 

*वेटा बहुत हुआ अब तो ला दे मेरी दवाई*// 

  

 *टूशन से जब लोटा प्यारा  वेटा*/  

*मुझ पर तरश करो पापा, फट गया पेंट और फट गया लंगोटा*// 

*वाल सखा  ने भी  मार लिया जब ताना*/

*मास्टर चीश होते हे, इन्हे खर्च करना नहीं आना*// 

*सहेली बोल उठी पीछे से अब और न चिथड़ा करो*/

 *कुछ तो बचने दो खाते में कुछ तो शर्म करो*//


*रात हुई निंदिया भी मांगे कमरे में ठंडा*/

*कट रही जिंदगी यूँ ही , न चल रहा  धंधा*// 

 *रात चांदनी आकर  बोली सो जा प्यारे बरना यूँ  फ़िक्र में लगा ना लेना फंद*/

*इतना ही था तुम दोनों का सांग*// 

 *फिर  आएगी एक दिन सैलरी तब तक तू धीरज धरना*/

*कट जाएगी हर मुसीबत हे !अश्रु अब ना गिरना*//

*कम खाओ गम खाओ, नहीं मिलती अब पुरानी पेंशन*/

*शांति से काटे  जिंदगी , कभी ना ले मुरारी टैंशन*//

🙏🌺🙏🍀🌳🙏🌺🙏स्वरचित कविता :-

*मुरारी लाल राय*

*माध्यमिक शिक्षक*

*शास. मॉडल स्कूल करेरा जिला शिवपुरी (म.प्र.)*

Mob. 917976550

Monday, January 4, 2021

तकनीक बनाम तरकीब

 

तकनीक के साथ साथ तरकीब भी आवश्यक है!

   वर्तमान परिदृश्य को देखकर सब यही कहने लगे है की अब तो तकनीक का युग  है अब हमारे लिए करने को कुछ है ही  नहीं ,, हमारे अनुभवी और ऊर्जावान साथी भी वर्तमान के इस बदलाव की धारा को नदी के समान दूर से ही खड़े रहकर निहार रहे है ,, में ऐसे सभी साथियों से आज ये कहना चाहता हूँ की आप विचार कीजिये जब पृथ्वी पर तकनीक नहीं थी तो हमारे पूर्वजों ने कैसे अपने जीवन को चलाया होगा ,, आवस्यकताएँ , समस्याएं तो सदा इंसान की परछाई बन कर साथ रही है ,, जब आप गहराई से विचार करेंगे तो पाएंगे की कैसे उस समय इंसान ने अपनी तरकीब का सहारा ले कर जीवन को आनंददायक बनाने का प्रयाश किया होगा और आज हम इस आधुनिक युग के दर्शन कर रहे है वो कहीं ना कहीं भूतकाल के तरकीबों से ही संभव हो पाया है , तकनीक और तरकीब लगभग के जैसे ही शब्द है  और इनके कार्य भी!

 जब तकनीक नहीं थी तो तरकीब के सहारे ही इंसान ने पहिये की खोज की होगी , पहिया बन गया तो उसे बैल गाढ़ी में लगाने की तरकीब भी सूझी होगी जब गाढ़ी बन गई होगी तो उससे खींचने के लिए जानवरों के उपयोग की भी तरकीब मिल गई होगी , गाढ़ी सही चले इस हेतु समतल सड़क के निर्माण की आवश्यकता को इंसान की सूझबूझ और तरकीब से  हल किया गया होगा , बात को लम्बा नहीं खींचता बाकि का इतिहास आप सभी ने अच्छे से पड़ा ही है में तो बस इंसानो की तरक़ीब की प्रशंसा  और साथ ही  उस पर गर्व करने का अवसर खोज रहा था ,, जब इस विषय पर जब आप अपने छात्रों, परिचितों और मित्रों के साथ समय निकाल कर विस्तार से चर्चा ,,,,,😒😒

अरे माफ़ कीजिये में भूल गया परिचितों और मित्रों से इस विषय पर क्या किसी भी विषय पर चर्चा के लिए समय ही कहाँ है , हमारा सारा समय तो तकनीक ने ले लिया है हम इतना व्यस्त हो गए है की समय कहा है की हम कभी दूरों को तो छोड़ो  अपने आप से ही दो बातें कर पाएं ,, आपको यह जान कर हेरानी नहीं होनी चाहिए की हमारे पूर्वजों की तरकीब इंसान को समस्याओं को जीतने में बहुत कारगर थी पर आज की तकनीक   हमें एक के बाद एक नयी समस्या में डालती जा रही है ,,

🤔🤔 तो क्या में तकनीक का विरोधी हूँ शायद नहीं!  जीवन की नाव को किनारे लगाने हेतु तकनीक की पतवार को उपयोग करना ही  बुद्धिमानी है ,, मजबूरी नहीं ,, बिना तकनीक की पतवार के भी नाव किनारे लगाई जा सकती है बस हमें एक अच्छी सी तरकीब निकालनी  होगी ️😀😀

अब तो आप भी मेरे इस नए बिचार से सहमत होंगे की तकनीक हो या ना हो तरकीब हो तो जीवन की प्रत्येक समस्या का समाधान संभव है!

 अतः मित्रों आप सभी तकनीकों  का प्रयोग करते रहे इससे कोई हानि नहीं ,, हानि तो वस ये है की हम तकनीक को ही सब कुछ मान लेते है , हम तरकीब का सहारा लेना भूलते जा रहे है , और जब तक हम अपने विवेक का उपयोग समस्यों का हल  तरकीब के द्वारा निकालने के लिए नहीं करेंगे ,, हम ऐसे ही तकनीक के गुलाम बनते जाएंगे!

 तकनीक को उपयोगी वस्तु मानें आवश्यक नहीं

 तरकीब हमें चेत्तन्न करती है और तकनीक जड़ !

जी हाँ , मित्रों ,, आप इस कथन को झुटला नहीं सकते आप भी इसे भली भांति जानने लगे है की किस प्रकार तकनीक के अधिक प्रयोग से हम अपने मस्तिष्क का प्रयोग भूलते जा रहे है ,, पहले के समय कठिन सवालों को उँगलियों के सहारे हल कर लिया जाता था मुझे याद है  मेरे दादा जी अधिक पढ़े लिखे नहीं थे पर उनका हिसाव किताब एक दम सही रहता था और आज हम और हमारे भावी युवा वच्चे है जो सरल गड़नाओ को बिना तकनीक के सहारे नही कर पाते ,,

अतः आप किसी भी तकनीकी साधन का उपयोग करते समय इसके अधिक से अधिक उपयोग और कम से कम दूशप्रभाव की तरकीब को अपने विवेक के सहारे खोजते रहें जिससे आप तकनीक का गुलाम बनने से वचे रहेंगे साथ ही आप उस साधन का अधिकतम कार्यों में उपयोग कर सकेंगे अंततः आप अपने जीवन में तकनीक को सहारा बनायें समस्या नही!

जीवन आनंद और हर्ष से जीने के लिए है इसे तरकीब की खोज में लगाए जिससे हमारे साथ साथ सम्पूर्ण मानव समाज के कल्याण के रस्ते खुलेंगे ,,

राधे राधे

मुरारी लाल राय 

माध्यमिक शिक्षक 

शास. मॉडल स्कूल करेरा जिला शिवपुरी 

mob. 9179765560

E-mail: mlrai0405@gmail.com


                                 तकनीक और तरकीब पार्ट 2

 साथियों राधे राधे

पूर्व लेख में आपने जाना  की कैसे तकनीक और तरकीब का आपसी तालमेल रहने से हम सफलता की रह आसान बना सकते है उसी क्रम में हम चर्च कर रहे है की कैसे तरकीब खोज कर हम तकनीक के प्रयोग और उसके लाभ के क्षेत्र का विस्तार कर सकते है , इसे एक उदाहरण से समझें-

  वर्तमान परिस्थिति में हमारे प्रत्येक कार्य के करने के तरीके में परिवर्तन आया है , हम जैसा सोचते थे जैसे अपने कार्यों को जिस गति से सम्पादित करते आ रहे थे अब कोरोना महामारी के प्रकोप से हम सबको अपनी अपनी कार्ययोजना में परिवर्तन हेतु मजबूर होना पड़ा है , हमें व्यवसाय, प्रतिष्ठान कार्यस्थल हर जगह नयी योजना का निर्माण करना पड़ रहा होगा , ऐसे परिवेश में तकनीक का भी उपयोग कुशलता के साथ हो सके उस हेतु नवीन तरकीब की खोज करने की आवश्यकता है , अतः साथियों आपने किस तरकीब का सहारा लिया जिससे इस संकट के समय आप अपने व्यवसाय और कर्तव्य के निरंतर गतिशील बनाये रखा है उसे आप अपने साथियो के साथ बांटे जिससे आपके अनुभवों और कौशल का लाभ समाज को हो सके , चूँकि में शिक्षा के क्षेत्र में हु अतः अपने तरकीब के कुछ अंश आप सभी के साथ बांटना चाहता हूँ ,

Saturday, May 16, 2020

YesMan ' सदा आपकी सेवा में'

YesMan ' सदा आपकी सेवा में' 

                    नमस्कार मित्रों , 

     बदलते समय और परिवेश में हमारी सुविधाएं बहुत बड़ी है | किन्तु जितनी सुविधाएँ वड़ी है उससे कही अधिक समस्याएं पैदा हो गई है | इन समस्यायों का समाधान समाधान करना या उनका उपाए निकालना हमेशा से हमारे लिए चुनौती भरा कार्य रहा है |  

     आज कल हमारी कई समस्याओ को हमारे स्मार्ट फ़ोन ने काफ़ी हद तक ह्लः कर दिया है |  किन्तु फिर भी इसकी उपाए नहीं दिखता  की जो अचानक से आये समस्या या अचानक आये काम - काज को आसान बना सके | आज सबसे बड़ी समस्याओं मई एक है हमारे पारिवारिक रिश्ते और उनसे जुड़े सभी सम्बन्धी जन जो हर घड़ी हमारे लिए " जी सर"  बोले हमारे आस पास मौजूद रहते है उन सब को कैसे एक साथ जोड़ कर रखा जाये | गांव में  इक कहाबत है जिस घर मै जितने सदस्य उस घर का काम काज उतनी सुबिधा से हो जाता है | 

     उन्ही सब यस मैन की टीम को एक रखने के हमारी इस समस्या को आप हमारे ' YesMan ' मोबाइल एप्प के माधयम से प्रयाश कर रहे है की जो जो पारिवारिक रिश्ते हमारी ताकत रही है , सच्ची जीवन पूँजी है,उसे आधुनिकता और स्मार्टफोन के इस युग मे जीवंत रखा जा सके | 

     YesMan का मुख्य उद्देश्य हमारी एकता की शक्ति को वनाये रखना है | इस ऐप्प के माध्यम से हमारा प्रयाश रहेगा की हम हमारे करीबी रिश्ते-नाते दार , दोस्त,हितेषी, परिचितो के समूह को एक स्थान पर जोड़े रखें और जब जैसी समस्या हो तो अपने YesMan को सूचित कर सकें की हमे आपकी आवश्यकता है | 

 इसी उद्द्येश्य और भरोसे के साथ हम अपने मोबाइल ऐप्प को आपकी सेवा मै प्रस्तुत कर रहे है, इसमे जो कमी या सुधर आप चाहते हो तो कृपया हमे आपने  सुझाव देते रहे जिससे हम इस ऐप्प को और आकर्षक बना सके  |

     बहुत बहुत धन्यवाद | 

 आपका - मुरारी लाल राय 

       शिक्षक 

शास.मॉडल स्कूल करैरा  

 

 


Lock down Nahi….. look down

Lock down Nahi….. look down

 

 

Namaskar dosto,

             Aap sabhi kese ho , aasha hai aap sabhi ache hoge aaj kal desh aur duniya bahut gambheer veemari se lad rahi hai, sari duniya aaj corona ke sankat ko taal nahi pa rahi hai sarkaron ne sab kuch lock kar diya hai . kuch samay tak hum iss asha mai rahe ki sarkare aur unke anubhavi team sab kuch sambhal legi ….. per app he bata sakte ho ki in sarkaron ne kitni safalta pai aur kitna kuch kho diya. Are jab yahi sab karna tha sabhi ko u he apne haal per chod dena tha to kyon thaliyan pitbai kiyon diye jalwaye ….. akhir kiyon ??

       Mera aaj ka Topic issi ko kahne ka prayash kar raha hai ki iss duniya aur us duniyan per hukumat chalane bale team ko sochne ke liye majboor hona padega ki akhir hum kiya karana chah rahe hai aur kiske liye ???

       Mene pada hai aur apne students ke liye padaya bhi hai ki hamara bharat ab viksit desh ban raha hai , hume ab doosre desh  bahut respect dene lage hai . per aaj kal hamare road aur high way per jis bharart ki tashbeer dikh rahi h bo to mujhe kiya har kissi ko rula deti hai yah sochne per majboor kar deti hai ki akhir iss desh mai pasine ka kiya ye mol hota hai ???

             In vecharon ne kitne mahnat aur khoon paseene se desh ke liye apna lahu paseena baha kar isse banaya aur iss sankat ki ghadi mai aaj bo akela hai asahah hai ,, majboor hai kya iss liye ki bo “ MAJDOOR” hai ?

       Aaj duniyan mai iss baat per bahas chal rahi hai ki ‘CORONA’ prakartik hai ya manav ne isse banaya hai. Mene iss per bahut vichar – vimarsh suna per dil ye nahi maan raha ki iswar ki basai iss sundar c duniya ko koi inshan ya uske team itna pareshan kar sakti hai.  Mujhe to nahi lagta ki insane abhi ya kabhi itna takatvar ho sakta hai ki bo duniya ko “LOCK-DOWN” kar sake. NAHI !!! ye to kabhi nahi ho sakta . to kiya fir bahi hume aur sundar se duniya ko banane bala jo sarv saktimaan hai  swam hume “LOCK-DOWN” nahi “LOOK-DOWN” hone ke liye bol raha hai .

       Insan ko ek baar to sochna he padega ki kiya yesa he hua hai ki iswar hume “LOOK-DOWN” hone ke liye isara kar rahe hai. Ji ha hume ab “LOCK-DOWN” nahi “LOOK-DOWN” hona padega. Hume apni prathvi aur uski vanaspati uske prakratik vatavaran se judna hoga.  samajhna chahiye aur veer yodhha ki tarah iski suraksha bhi karna chahiye . hamare samajh daron ka vikash to dekh liya ki kiss tarah apne niji mahtvakancha ke liye iss sundar dharti ko kita ujad  chuke . kintu ab desh ke sachhe sapooton ko ye sankalp lena hoga ki humre mahnat aur paseene se iss dharti ko na ujada ja sake , hum ye bhi sankalp le ki hum ab koi yesa kaam ya majdoori nahi karenge jisse dharti ka kisi bhi prakar se nukshan ho koi hani ho.

       Aaj corona ke karan hamare lakhon karodon logon ke muh se khane ka ‘kaur’ nivala cheen liya hai kiyo ki kahi na kahi humare majdoori se he aaj dharti ko itna pollution dekhna pad raha hai. Agar hum yesa na karte to iswar hume iss tarah apne gharon mai      “LOCK-DOWN” ke liye na bhejte . bo sarwagya hai sab janne bala hai leki jab galti mai hum bhi samil rahe hai to saja mai kese piche choot sakte hai . isliye meri aap asabhi se prathna hai ki aap “MAJDOOR” ho ‘MAJBOOR’ na bano “MAJBOOT” bano. Aur itna “MAJBOOT” bano ki iss duniyan ke logon ke swarth poorti mai hamara khoon pasina na lage !

       Ab hum sabko “LOCK-DOWN” ke sath sath “LOOK-DOWN” yani neeche bhi dekhna chahiye ki hum kahi koi galti to nahi kar rhe kahi khamare kisi kaam ya karya se paryavaran ko koi chatty to nahi pahuch rahi .

 Desh mai corona ka to trailer chal raha kintu ab agar nahi sudhre to bo din door nahi jab hum prakarti ka “KOH-RAM” dekhenge aur sayad ye sab dekhne ke liye hum rahe ya nai bhi!

Global warming, all types of pollution, Rape , murder, gaw hattya  aur bahut yese kaam hai jise iswar bahut bahut naraj ho gaye hai. Iss liye mera aap sabhi se ek baar punah karvadhya nivedan  hai ki prakarti ke aur dekhe aur iss duniya ko na bigaden isse apne haal pe chod den agar ho sake to isse aur sundar banaye….. insane aur janbaron ki madad kare seva Karen.

 bs yahi sab ke sath aap sabhi se bida leta hu. Aap sabhi ka bahut bahut dhanyabaad ki apne mere vicharon ko pada aur mujhe asha aur pura bharosa bhi hai aap isse pad kar bhool jana nahi chahenge iss par vichar awasye karenge

radhe radhe

good night

apka 

    Murari Rai

    Teacher 

Govt Model hss Karera

Date 14/05/2020

Place karera