*चोर चोर मोसेरे भाई भाई*
//बनाम//
*पीड़ित पीड़ित जुड़बा भाई भाई*
🎋🍁😭😭 😒😒😢🌵🌲
*साथियों बात जरा हटके जरूर है पर बात में अगर बात न हो कहना*
,, *जब दो एक जैसे कार्य करने बाले व्यक्ति या पात्र मिलते है तो हिंदी का एक मुहावरा अकसर उस मिलन का साक्षी होता है की चोर चोर मोसेरे भाई* ,,
*बड़ी अजीव बात है बिना किसी गलती दो सामान कार्य करने बालों को चोर की संज्ञा दे दी जाती है*,,
आज में इस हिंदी के मुहाबरे में सुधार करना चाहता हूँ ,, *विशेष कर पेंशन न मिलने की पीड़ा से पीड़ित दो साथी जब आपस में मिल रहे हो तो हमे उस समय संज्ञा दी जानी चाहिए की
*देखो ये दो पीड़ित-पीड़ित जुड़वाँ भाई भाई!*
*ये जुड़वा भाई जा रहे है* ,,
🧑🦯👩🦯👬👫👫👫
*जब हम अपने किसी शासकिय विभाग के किसी साथी से मिल रहे हों तो जुड़वा भाई के समान भाव प्रकट होना चाहिय*,
🤝🤝✊✊🙏🙏
*और मुझे भरोसा है की जिस दिन किसी की पीड़ा हमारी पीड़ा बन जाएगी ,, किसी दुसरे के दर्द का अहसास हमे होने लगेगा ,, तो साथियों बो दिन दूर नहीं ,, जब आप के और मेरे दर्द की एक ही दवा हमे प्राप्त ना हो जाये ,, ये जो जुड़ाव का क्षण होता है बहुत ही करुणा और प्रेम समेटे हुए रहता है इस करुणा में जितना करूँण रस है ,, उतना तो गन्ने की लाठी में ना रहता होगा*
,, 😭😭😭😭
📝 Murari Lal Rai📝
🙏🌲🍁☘️🍀🌺💐🙏:
*आह मेरी सेलरी सहेली*
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*पूरे महीने बाद है आयी सज धज के खाते में सहेली*/
*ऐसा लगा अब तो ह्लः होगी घर के खाने की पहेली*//
*सैलरी एक ऐसी ठिठोली*/
*आशयों की है हजमोली*//
*नजर पड़ी जब कलाई पर*/
*राखी बोल उठी भैया आ न जाना खली हाथ बेटी की सगाई पर*//
*मामा जो हूँ कमी कैसे करू इस अवसर पर*/
*खूब भात सजाओ प्रिये , दाग ना लगे पीहर पर*//
*धीरे से भाई बोला भैया क्या गाड़ी का पेट भरा दिया?*/
*हक़ से प्रिये बोली कार्ड दो साडी लेने को लेट करा दिया*//
*सहेली के टुकड़े कैसे करुं*/
*पिछली EMI कैसे भरू*//
*अश्रु डाल दिए सहेली ने जब कांपती आवाज दी सुनाई*/
*वेटा बहुत हुआ अब तो ला दे मेरी दवाई*//
*टूशन से जब लोटा प्यारा वेटा*/
*मुझ पर तरश करो पापा, फट गया पेंट और फट गया लंगोटा*//
*वाल सखा ने भी मार लिया जब ताना*/
*मास्टर चीश होते हे, इन्हे खर्च करना नहीं आना*//
*सहेली बोल उठी पीछे से अब और न चिथड़ा करो*/
*कुछ तो बचने दो खाते में कुछ तो शर्म करो*//
*रात हुई निंदिया भी मांगे कमरे में ठंडा*/
*कट रही जिंदगी यूँ ही , न चल रहा धंधा*//
*रात चांदनी आकर बोली सो जा प्यारे बरना यूँ फ़िक्र में लगा ना लेना फंद*/
*इतना ही था तुम दोनों का सांग*//
*फिर आएगी एक दिन सैलरी तब तक तू धीरज धरना*/
*कट जाएगी हर मुसीबत हे !अश्रु अब ना गिरना*//
*कम खाओ गम खाओ, नहीं मिलती अब पुरानी पेंशन*/
*शांति से काटे जिंदगी , कभी ना ले मुरारी टैंशन*//
🙏🌺🙏🍀🌳🙏🌺🙏स्वरचित कविता :-
*मुरारी लाल राय*
*माध्यमिक शिक्षक*
*शास. मॉडल स्कूल करेरा जिला शिवपुरी (म.प्र.)*
Mob. 917976550